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क्रिकेटर जसप्रीत बुमराह के दादा रोटी को मोहताज़, 84 साल की उम्र में टैंपो चलाकर भर रहे पेट

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डेस्क। भारतीय टीम के स्टार खिलाड़ी जसप्रीत बुमराह के 84 वर्षीय दादा संतोखसिंह बुमराह बुढ़ापे में टेंपो चलाकर पेट पालने को मजबूर हैं। संतोख सिंह उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के किच्छा में आवास विकास कॉलोनी में किराए के मकान में रहते हैं।

 

पिता की मौत के बाद जसप्रीत और उनकी मां दलजीत परिवारिक कारणों से अपने दादा से अलग हो गए थे। वे फिर कभी दादा से नहीं मिले। दलजीत तब स्कूल में प्रिंसिपल थीं। संतोख कहते हैं, ‘मेरी यह दुआ है कि पोता क्रिकेट के खेल में खूब तरक्की करे और देश का नाम रोशन करे। मेरी आखिरी तमन्ना है कि एक बार अपने पोते को गले से लगा सकूं।’ संतोखसिंह ने स्थानीय एसडीएम नरेश दुर्गापाल से आर्थिक मदद की गुहार की है।

 

जसप्रीत बुमराह के दादा अपने एक दिव्यांग बेटे के साथ किराये के टूटे फूटे कमरे में रह कर ऑटो टैम्पो चलाकर अपनी गुजर बसर कर रहे हैं। बुमराह के दादा के पास कभी अहमदाबाद में तीन फैक्ट्रियां थी, लेकिन वो सब अब बीते दिनों की बात हो गई है।