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20 साल पहले दुनिया ने देखा था ‘रेगिस्तान’ में सचिन तेंदुलकर का तूफ़ान

sachin tendulkar Coca Cola Cup

डेस्क। आज क्रिकेट में रन बनाना कितना आसान हो गया। लेकिन अगर आज से 20 साल पहले के क्रिकेट की बात करें तो शायद ये इतना आसान नहीं था। 20-25 साल पहले ये क्रिकेट का वो समय था जहां से वेस्टइंडीज का सूरज ढलान पर था वही ऑस्ट्रेलिया का उदय पर।

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लेकिन उस समय क्रिकेट में एक अनजान लड़का अपना जलवा दुनिया को दिखा रहा था। ये कोई और नहीं बल्कि करोड़ों भारतीय के दिल पर राज़ करने वाले क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर। जिसे देश के गांव-ढाणियों में भी जाना जाता था।सचिन ने ना जाने टीम इंडिया को कितनी बार जीत दिलाई है। लेकिन कुछ जीत आज भी लोगों के जेहन में है।

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उस समय ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान को हराना सबसे मुश्किल था। लेकिन सचिन के आगे उनके तेज़ तर्रार गेंदबाज़ बेअसर दिखाई पड़ते थे। आज हम सचिन के उस मैच की बात करते है जिस पर पूरी दुनिया की नज़र थी। 1998 में शारजाह के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम की अग्निपरीक्षा थी।

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पहले खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया ने 284 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इस मैच में माइकल बेवन ने नाबाद शतक जमाया था। इतने बड़े स्कोर को देखते हुए टीम का मनोबल पहले ही कम हो गया। एक मात्र आश थी वो सचिन तेंदुलकर से। रेगिस्तानी जगह होने के कारण शारजाह के मैदान पर करीब 45 डिग्री तापमान पर पहले 50 ओवर फील्डिंग के बाद बल्लेबाज़ी कोई छोटा काम नहीं था। ऑस्ट्रेलिया के पास शेन वार्ने, फ्लेमिंग, कास्प्रोविच जैसे धुरंधर गेंदबाज़ थे।

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इस पारी को रेगिस्तानी तूफ़ान नाम दिया गया। क्योंकि दूसरी पारी शुरू होने से पहले इस मैदान पर करीब 25 मिनट तक धूल भरी आंधी से खेल रोकना पड़ा। जिसके बाद टारगेट को 46 ओवर में 277 रनों का किया गया। हालांकि इस मैच में टीम इंडिया 26 रनों से हार गई। लेकिन सचिन की इस पारी से लोगों का दिल जीत लिया।

 

इंडिया को फाइनल में पहुंचने के लिए 237 रनों का स्कोर बनाना था। और जीत के लिए 278 रन बनाने थे। एक तरफ टीम के विकेट गिरते रहे लेकिन दूसरी तरफ सचिन का जलवा पूरी दुनिया देख रही थी। सचिन ने इस मैच में 237 रनों का स्कोर बना कर टीम को फाइनल में प्रवेश तो दिला दिया लेकिन टीम को जीत दिलाने से 26 रन कम पड़ गए। इस मैच में सचिन ने 131 गेंदों पर 143 रनों की पारी खेली जिसमे 9 चौके और 5 छक्के शामिल थे। सचिन इस मैच में ‘वन मैन’ आर्मी की तरह नज़र आए।

 

इस मैच के दो दिन बाद फाइनल 24 अप्रैल को ऐसी मैदान पर खेला जाना था। उस दिन सचिन का जन्मदिन भी था। उस मैच में सचिन ने फिर शतक लगाया और इस बार टीम को जीत तक लेकर गए। इस तरह ऑस्ट्रेलिया के विजय रथ को अकेले सचिन ने रोक कर दुनिया को एक बड़ा सन्देश दिया था।