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Teachers Day 2018: इन 2 गुरुओं की महानता आज तक नहीं भूले लोग

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डेस्क। हर साल देश में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस का बड़ा उत्साह रहता है। प्राचीन समय से गुरू शिक्षा का प्रचलन है। बिना गुरू ज्ञान नहीं, गुरू ही संसार ऐसे बहुत सी कथा गुरू से जुड़ी हुई है। लेकिन देश में शिक्षक दिवस को एक अलग ही महत्व दिया जाता है। आज हम आपको ऐसे महान गुरुओं के किस्से बताएंगे जो आज तक प्रचलित है। उन गुरुओं की महानता वाकई सुनने में बड़ा अच्छा लगता है।

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1. गुरु वसिष्ठ​ का नाम शयद सबने सुना होगा। उनकी महानता ही थी कि भगवान राम के गुरू भी थे। वसिष्ठ राजा दशरथ के राजकुल गुरु भी थे। गुरू वसिष्ठ ने राम जी को योग के बारे में बताया था। उनकी दशरथ जी के दरबार में राजा के बराबर मान्यता थी। लोग उनका सम्मान राजा के बराबर ही करते थे।

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2.

द्रोणाचार्य जैसा गुरू शयद ही धरती पर फिर हुआ होगा। द्रोणाचार्य कि महानता का पाठ आज भी हम पढ़तें है। द्रोणाचार्य द्रोणाचार्य ऋषि भरद्वाज तथा घृतार्ची नामक अप्सरा के पुत्र तथा धर्नुविद्या में निपुण परशुराम के शिष्य थे। द्रोणाचार्य पांडु के पाँचों पुत्र तथा धृतराष्ट्र के सौ पुत्रों के गुरु थे। गुरु द्रोणाचार्य को एकलव्य ने अपना अंगूठा गुरु दक्षिणा के रूप में दिया था।

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